बद्रिकाश्रम धाम भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र – स्वामी बालकनाथ

गोपेश्वर (चमोली)। बदरीनाथ धाम में भारतीय ज्ञान परम्परा की ऐतिहासिक भूमि बद्रिकाश्रम धाम विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते बतौर मुख्य अतिथि स्वामी बालकनाथ महाराज ने कहा कि बद्रिकाश्रम धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि सनातन भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत केंद्र है।

नारायण स्वामी आश्रम में आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि स्वामी बालकनाथ महाराज ने  कहा कि हिमालय की यह पुण्यभूमि सदियों से ऋषियों, योगियों और तपस्वियों की साधना स्थली रही है, जहां से वेद, उपनिषद, योग और अध्यात्म की चेतना पूरे विश्व में प्रवाहित हुई। कहा कि बदरीनाथ धाम का प्रत्येक कण भारतीय संस्कृति, तप, त्याग और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है। यही वह भूमि है जहां नर-नारायण ने तप किया, महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना की और आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म की पुनर्स्थापना का कार्य किया।

संगोष्ठी में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देवप्रयाग परिसर के निदेशक प्रो पीवी सुब्रह्मण्यम ने बदरीनाथ धाम की अलौकिक महिमा और रहस्यमयी परंपराओं पर प्रकाश डालते कहा कि बद्रिकाश्रम धाम वैश्विक आध्यात्मिक सभ्यता और ज्ञान-विज्ञान का प्राचीन स्रोत रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रमाकांत पाण्डेय ने कहा कि हिमालय की गोद में स्थित यह धाम सदियों से आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र रहा है। उन्होंने बदरीनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक और आध्यात्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां आज भी ऋषि परंपरा की सूक्ष्म चेतना विद्यमान है। बदरीनाथ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश मेहता ने कहा कि अलकनंदा तट, तप्तकुंड और नारद शिला जैसे पवित्र स्थल भारतीय ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं।

उद्घाटन सत्र में भारतीय शिक्षा पद्धति, गुरुकुल परंपरा, योग-विज्ञान, पर्यावरण चेतना और सनातन जीवन मूल्यों पर भी चर्चा की गई। वैदिक मंत्रोच्चार, मंगलाचरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया। इस दौरान हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. दिनेश पांडेय की पुस्तक वाक शुद्धि का विमोचन भी किया गया।

संगोष्ठी का आयोजन उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय रघुनाथ कीर्ति परिसर एवं श्री अग्निमंदिर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न राज्यों से 350 से अधिक प्रतिभागी, शोध छात्र और प्रोफेसर भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य संयोजक डॉ. मनोज विश्नोई ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. प्रदीप सेमवाल ने किया।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सोशल मीडिया की अफवाहों में न आएं श्रमिक, केंद्र सरकार ने न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ाया – उप श्रमायुक्त विपिन कुमार

Fri May 15 , 2026
वेतन वृद्धि को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारी पर श्रम विभाग ने जारी की स्पष्टता हरिद्वार। उप श्रमायुक्त विपिन कुमार ने श्रमिकों से सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक सूचनाओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान समय में न्यूनतम वेतन […]

You May Like

Breaking News

Share
error: Content is protected !!