ग्रामीणों का ऐतिहासिक फैसला, पांडुकेश्वर और रविग्राम में समारोहों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध, नियम तोड़ने पर 21 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान

​जोशीमठ/पांडुकेश्वर । देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जनपद में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जन-आंदोलन तेज होता जा रहा है। बद्रीनाथ धाम के मुख्य पड़ाव पांडुकेश्वर और जोशीमठ के रविग्राम वार्ड ने एक सुर में नशामुक्ति का संकल्प लेते हुए सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में शराब के सेवन और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ग्रामीणों के इस साहसिक निर्णय की पूरे जनपद में सराहना हो रही है, जिसे भविष्य की पीढ़ी के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है।

​कुबेर नगरी पांडुकेश्वर में ऐतिहासिक फैसला

​’कुबेर नगरी’ के नाम से विख्यात पांडुकेश्वर में ग्राम प्रधान मनोरमा देवी की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि गांव के किसी भी सामाजिक कार्य या सार्वजनिक समारोह में शराब का प्रयोग पूरी तरह वर्जित रहेगा। इस बैठक में गांव के विभिन्न समूहों (थोक) के प्रतिनिधियों ने एकजुटता दिखाई।

​बैठक में कम्दी थोक अध्यक्ष जगदीश पंवार, भंडारी थोक अध्यक्ष कल्याण सिंह, और मेहता थोक अध्यक्ष राजदेव मेहता सहित महिला मंगल दल की अध्यक्ष बीना पंवार और क्षेत्र पंचायत सदस्य साधना कन्नी मौजूद रहे। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि देवभूमि की मर्यादा और गांव की शांति बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य था। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक दंड लगाने का भी प्रावधान किया गया है।

​रविग्राम वार्ड में 21 हजार रुपये का कड़ा जुर्माना

​दूसरी ओर, जोशीमठ नगर के रविग्राम वार्ड ने नशामुक्ति के अभियान को और अधिक सख्त बनाते हुए बड़ा ऐलान किया है। वार्ड सभासद प्रवेश डिमरी ने बाताया कि वार्ड के भीतर होने वाले किसी भी सामाजिक, धार्मिक कार्यों या विवाह समारोहों में मादक पदार्थों और शराब का वितरण पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है।

​विशेष प्रावधान 

रविग्राम वार्ड के नियमों के अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति इस पाबंदी का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर 21,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। वार्ड वासियों का मानना है कि केवल नसीहतों से बदलाव संभव नहीं है, इसलिए जुर्माने का कड़ा प्रावधान किया गया है ताकि शादियों और उत्सवों की पवित्रता बनी रहे।

​युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा

​इन दोनों क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि समारोहों में बढ़ता नशे का चलन न केवल परिवारों पर आर्थिक बोझ डाल रहा था, बल्कि युवाओं के भविष्य को भी अंधकार में धकेल रहा था।

 

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