Income Tax Act 2025 लागू होते ही बदलेंगे सैलरी के नियम, जानिए असर

नई दिल्ली। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल 2026 से देश में नया आयकर कानून लागू होने जा रहा है। Income Tax Act 2025 के लागू होते ही वेतनभोगी कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन भत्तों, सुविधाओं और अन्य लाभों के मूल्यांकन के नियम कड़े कर दिए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी, टैक्स देनदारी और सैलरी का ब्रेकअप प्रभावित हो सकता है। अब कंपनियों को वेतन संरचना को नए नियमों के अनुरूप पुनर्गठित करना होगा, जिससे भले ही कुल CTC समान रहे, लेकिन उसमें शामिल विभिन्न घटकों का अनुपात बदल सकता है।

नए नियमों में भत्तों (Perquisites), प्रतिपूर्ति (Reimbursements) और नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले लाभों की स्पष्ट टैक्सेबल वैल्यू तय की गई है। पहले जहां कई भत्ते लचीले तरीके से तय किए जाते थे, अब उन पर सख्ती से कर लगाया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों की टैक्सेबल इनकम बढ़ने की संभावना है।

इसके साथ ही, नए लेबर कोड के प्रावधानों का भी असर सैलरी स्ट्रक्चर पर पड़ेगा। नियमों के अनुसार अब बेसिक सैलरी कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी है। इससे भविष्य निधि (PF) और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ सकता है, जबकि टैक्स-फ्री भत्तों की गुंजाइश घट सकती है।

नए आयकर नियमों के तहत कई ऐसी सुविधाएं भी टैक्स के दायरे में लाई गई हैं, जो पहले कर-मुक्त मानी जाती थीं। कंपनी द्वारा दिया गया आवास, लंबे समय तक होटल में ठहरना, ऑफिस की कार का निजी उपयोग, ड्राइवर की सुविधा, घरेलू नौकर, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की फीस, गिफ्ट, क्लब सदस्यता और कंपनी क्रेडिट कार्ड से निजी खर्च—इन सभी को अब टैक्सेबल लाभ माना जाएगा।

करदाताओं के लिए पुराने और नए टैक्स सिस्टम के बीच चयन भी महत्वपूर्ण रहेगा। नए टैक्स सिस्टम में दरें कम हैं लेकिन छूट सीमित हैं, जबकि पुराने सिस्टम में HRA, धारा 80C और अन्य कटौतियों का लाभ मिलता है। ऐसे में किस विकल्प में कम टैक्स देना होगा, यह व्यक्ति की सैलरी संरचना पर निर्भर करेगा।

विशेषज्ञों ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे नए नियम लागू होने से पहले अपने सैलरी स्ट्रक्चर की समीक्षा करें, CTC का पूरा ब्रेकअप समझें और दोनों टैक्स सिस्टम के तहत अपनी कर देनदारी की तुलना करें। जरूरत पड़ने पर नियोक्ता से सैलरी पुनर्गठन पर भी चर्चा की जा सकती है।

सरकार का मानना है कि नए नियमों से टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी, जबकि कर्मचारियों के लिए यह बदलाव उनके वेतन और टैक्स प्लानिंग पर सीधा असर डाल सकता है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

कोटद्वार नागरिक मंच के तत्वाधान में विभिन्न संगठनों ने कोटद्वार की समस्याओं का निस्तारण न हो पाने से भरी हुंकार

Sun Mar 29 , 2026
कोटद्वार। कोटद्वार शहर की विभिन्न समस्याओं को संबंधित विभागों मुख्य रूप से नगर  आयुक्त, नगर निगम कोटद्वार एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष बार बार उठाने के बावजूद समस्याओं का जस का तस रहने के कारण कोटद्वार नागरिक मंच के तत्वाधान में विभिन्न संगठनों ने 02 अप्रैल 2026 को 1 बजे  गोखले […]

You May Like

Breaking News

Share
error: Content is protected !!